Har Dil Ki Hasrat Hai
खूबियाँ और खामियाँ, इंसान की फितरत है,
कामयाबी पाने की हर #दिल में हसरत है ,
खामियों को छोड़ दें हम ,खूबियों को अपना लें,
ऊंचाईयां पाने को, ऐसी सोच की ज़रूरत है...
खूबियाँ और खामियाँ, इंसान की फितरत है,
कामयाबी पाने की हर #दिल में हसरत है ,
खामियों को छोड़ दें हम ,खूबियों को अपना लें,
ऊंचाईयां पाने को, ऐसी सोच की ज़रूरत है...
वाह रे जमाने तेरी हद हो गई,
बीवी के आगे माँ रद्द हो गई !
बड़ी मेहनत से जिसने पाला,
आज वो मोहताज हो गई !
और कल की छोकरी, तेरी सरताज हो गई !
बीवी हमदर्द और माँ सरदर्द हो गई !
वाह रे जमाने तेरी हद हो गई.!!
पेट पर सुलाने वाली, पैरों में सो रही !
बीवी के लिए लिम्का, माँ पानी को रो रही !
सुनता नहीं कोई, वो आवाज देते सो गई !
वाह रे जमाने तेरी हद हो गई.!!
माँ मॉजती बर्तन, वो सजती संवरती है !
अभी निपटी ना बुढ़िया तू , उस पर बरसती है !
अरे दुनिया को आई मौत,
तेरी कहाँ गुम हो गई !
वाह रे जमाने तेरी हद हो गई .!!
अरे जिसकी कोख में पला, अब
उसकी छाया बुरी लगती,
बैठ होण्डा पे महबूबा, कन्धे पर हाथ जो रखती,
वो यादें अतीत की, वो मोहब्बतें माँ की, सब रद्द हो गई !
वाह रे जमाने तेरी हद हो गई .!!
बेबस हुई माँ अब, दिए टुकड़ो पर पलती है,
अतीत को याद कर, तेरा प्यार पाने को मचलती है !
अरे मुसीबत जिसने उठाई, वो खुद मुसीबत हो गई !
वाह रे जमाने तेरी हद हो गई .!!!
थके हुए राही को मंज़िल की आश चाहिए ,
खो दिया जो हमने वो विश्वास चाहिए,
बर्बाद होते देश को बचाने की खातिर ,
फिर से हमको वो ही सुभाष चाहिए ,
डूबती नैया को बचाले मंझधार से ,
माझी हमें ऐसा पतवार वो ही चाहिए ,
त्याग में पटेल हो ,भगत सिंह ,आज़ाद हो ,
शास्त्री के जैसा ईमानदार चाहिए ,
ला सके जो पानी को खीच के पाताल से ,
अर्जुन का तीर और कमान वो ही चाहिए '
लालच में हो के चूर खो दिया जो हमने ,
वापस माँ भारती का सम्मान चाहिए...
जली चिताओं पर वीरों की
लोग रोटियां सेक रहे हैँ
एक दूसरे के मुंह पर ये
कालिख जमकर फेंक रहे हैँ
#राजनीति ये बन्द करो
आपस में ओछे तानों की
पतबारों को हाथ थाम लो
फ़िक्र करो तूफानों की
देश की इज़्ज़त बहुत बड़ी है
कुछ तो यारो शर्म रखो
लुटा दिए है लाल जिन्होंने
उन माँओं का मर्म रखो...
रोज रोज यहाँ नए खेल होते है रिश्ते टूटते और कमजोर होते है
हमारी आवारगी तो इससे अच्छी है रोज हमारे इन्तजार तो होते है
करती है करैक्टर हमारा दो मिनट में ये लड़कियां डिफाइन
तोड़ मिनटों में दिल हमारा ये लड़कियां कहती है आई कान्ट यू साइन
देख ये चिकने गोरे चहरे इंग्लिश बोर्ड वालो के बोलती है बेबी यू आर माइन
बट बेबी लिसेन टू मी आवारा हूँ डोंट वॉरी आई नेवर माइंड
रोज रोज यहाँ नए खेल होते है रिश्ते टूटते और कमजोर होते है
हमारी आवारगी तो इससे अच्छी है रोज हमारे इन्तजार तो होते है
दर्द आवारा का देख आई ऑलवेज माइंड सोचता हूँ जब आई नेवर फाइंड
क्यों वो आवारा है दिल उनके भी मोम होते है फिर वो ही क्यों बदनाम होते है
समझ आ गया वाशु यहाँ दिल नही चहरो से करैक्टर डिफाइन होते है
अगर मिलती है मोहब्बत जमाने से ये आवारा ही सबसे ज्यादा कुर्बान होते है
सोचता हूँ मैं भी आवारा बन जाऊ कुछ पल आवारगी के साथ बिताऊँ
पर ये मेरे आवारा दोस्त मुझे आवारा बनने नही देते, आवारगी के रंग देखने नही देते
मुझे फलक पे बैठा कर मुझको को पीने नही देते,नशा आवारगी का जीने नही देते
डरते है मैं कही बदनाम न हो जाऊ इस आवारगी में उनसे जुदा न हो जाऊ...