कहाँ से सीखें हुनर उसे मनाने का,,,
कोई जवाज़ न था उसके रूठ जाने का...

हर बात में सजा भी मुझे ही मिलनी थी,,,
जुर्म मैंने किया था उनसे #दिल लगाने का

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