एक टीस है दिल में, जिसे ज़माने से छुपाये बैठा हूँ
किसी की ज़फ़ाओं का सदमा, दिल में बसाये बैठा हूँ
गर चर्चा भी करूँ तो रो देता है ये नादान दिल,
कहीं हो न जाये वो बाग़ी, उसको मैं बहलाये बैठा हूँ
पता है कि चाँद सितारे न आएंगे जमीं पर कभी,
मैं फिर भी उन्हें, तोड़ लाने की ज़िद बनाये बैठा हूँ
न समझ लेना कि मैं इक पागल दीवाना हूँ कोई,
मैं तो पूरे होश में, #मोहब्बत का दीया जलाये बैठा हूँ
लगता है कि ज़िन्दगी यूं ही गुज़र जाएगी,
फिर यूं ही किस के वास्ते, झूठी आस लगाये बैठा हूँ...
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