आज तो भरे बाज़ार में, वफ़ा नीलम हो गयी !
बस देखते ही देखते, #ज़िन्दगी बेनाम हो गयी !
कल तक फ़रिश्ते थे जिनकी निगाहों में हम,
उनकी वफ़ा बिक कर, किसी के नाम हो गयी !
#इश्क़ के बाज़ार में शिकवा भला किस से करें,
अब तक जो पीर दिल में थी, वो आम हो गयी !
हम समझ लेंगे मगर कोंन समझाए दिल को,
जिसकी सालों की इबादत, ऐसे नाकाम हो गयी !
अजीब खेल है #मोहब्बत का मत खेलिए,
जिसने भी इसे खेला, ज़िंदगी शमशान हो गयी !
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