जो न सिखा सकीं किताबें, ज़िन्दगी ने सिखा दिया
उसने चेहरे की इबारतों को, हमें पढ़ना सिखा दिया
जो झूठ का नक़ाब ओढ़े बनते थे हमारे जानो जिगर,
उनकी असलियत से परदा, हमें उठाना सिखा दिया
जो अल्फ़ाज़ हलक़ में फंसे रहते थे काँटों की तरह
इस दुनिया के सामने अब, हमें कहना सिखा दिया
उलझनों के दरिया से कई बार डूब कर बच निकले,
खुदाया #जिंदगी के झटकों ने, हमें तैरना सिखा दिया...
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