जिंदगी का ताना बाना, न जाने क्यों उलझ जाता है
मैं एक छोर ढूढता हूँ, तो कहीं दूजा खिसक जाता है
सच कहा है किसी ने कि जीना आसान नहीं,
हम तो क्या, जमीं पर आकर भगवान भटक जाता है

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