क्यों मुश्किल में है ज़िंदगी, ज़रा सोचिये
क्यों अपने, पराये हो गये, ज़रा सोचिये
औरों को दोष देना आसान है दोस्तो,
सच में गुनाह किस का है, ज़रा सोचिये
ज़िंदगी भर जीते रहे सिर्फ अपने लिये,
अब औरों की ज़रूरत क्यों है, ज़रा सोचिये
अकेले राही को लाज़िम हैं दुसबारियां पर,
क्यों गुज़रते हैं कारवां सुकून से, ज़रा सोचिये...
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