ज़िंदगी जीनी है तो, घर से निकल कर देखो
कुछ धूल फांको, कुछ धूप में चल कर देखो
बेजान पत्थर भी तड़पते हैं ज़िंदगी के लिये,
उन्हें अपने दर ओ दीवार में, लगा कर देखो
गुलशन में लगा फूल मुस्कराता है रात दिन,
डाली से टूट कर वो कैसे हंसे, सोच कर देखो
ये ज़रा सी ज़िंदगी सब को जीने का हक़ है,
पर क्यों अज़ाब देते हैं हम, विचार कर देखो
खुद भी जियो औरों को भी जीने दो दोस्तो,
यही #ज़िंदगी का मंत्र है, ज़रा समझ कर देखो

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