क्यों कर न जाने दिल के, ये तराने बदल गए
जो साधे थे कभी हमने, वो निशाने बदल गए
हम तो ढोते रहे बस यूं ही #ज़िन्दगी को यारो,
हमारा वक़्त क्या बदला, कि जमाने बदल गए
गैरों की बात छोडो अपने न रहे साथ अब तो,
मतलब के हिसाब से, उनके बहाने बदल गए
जो कल तक निवास करते थे हमारे दिल में,
मौसम के हिसाब से, उनके ठिकाने बदल गए
हम कहाँ तक संभालें ये जज़्बात अपने,
इस कदर बदला समां, कि फसाने बदल गए...
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