न कुछ भी उनका क़ुसूर था, न कुछ मेरा क़ुसूर था
पर जब देखा दिल में झांक कर, वो तो मेरा गुरूर था
वो हमेशा मेरे क़रीब थे, कभी मैं भी न उनसे दूर था
दे दिया बस दिलों न धोखा, ये सारा उनका क़ुसूर था
न #दिल की गाँठ खोली न दर्द देखा आँखों में उनकी,
मैंने मुद्दत यूं ही गुज़ार दी, मस्ती में इतना चूर था
आँखों को खोल कर रखो जाने कब दीदार हो जाएँ,
बाद में मत कहना कि, ये नज़रों का क़ुसूर था...
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