ये दबदबा ये हुक़ूमत का मज़ा, हमेशा नहीं रहा करता
ये दौलतों ये शोहरतों का नशा, हमेशा नहीं रहा करता
कोई नहीं जानता ख़ुदा के इशारों को दोस्तो,
यहाँ अंधेरों व उजालों का समां, हमेशा नहीं रहा करता

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