जब वक़्त अच्छा था, तो रिश्ते निखरते चले गए
जब ख़राब दौर आया, तो रिश्ते बिखरते चले गए
आहिस्ता आहिस्ता अपनों ने किनारा कर लिया,
हम तो वही थे दोस्तो, मगर सब बदलते चले गए
दरख़्त जब सूखने लगा यूं वक़्त की मार से यारो,
बेवफा परिंदे भी, अपना ठिकाना बदलते चले गए
मुफ़लिस का कोई दोस्त नहीं हुआ करता,
जो कुछ बचे थे, बेहयाई से रस्ता बदलते चले गए
You May Also Like





