जाने कोंन सा रिश्ता, उनसे जुड़ने लगा है !
हर कदम उनकी तरफ, क्यों मुड़ने लगा है !
उधर की हवाओं में क्या तासीर है ऐसी कि,
ये ठहरा हुआ दिल भी, अब उछलने लगा है !
इस बदरंग सी ज़िंदगी में भर रहे हैं रंग कैसे,
फिर से तमन्नाओं का बादल, उमड़ने लगा है!
मोहब्बत कुछ और है तो फिर ये क्या है यारो,
क्यों कर धड़कनों का धीरज, उखड़ने लगा है !
यूं भी गुज़री है ज़िंदगी आँधियों के बीच "मिश्र",
किसी अन्जान से डर से, दिल दहलने लगा है!
You May Also Like





