क्या सोच कर उसे दिल में बसाया हमनें
क्यों उसका हुस्न दिल पर लगाया हमने
उस पत्थर दिल ने बदल दिया रुख अपना
अफसोस कि बेवफा को अपना बनाया हमने
वो सोचते हैं कि हमें ग़म नहीं फुरक़त का
कैसे कहें कि खूब आँसुओं को बहाया हमने
उसने दिल चूर कर दिया वफा को भूल कर
पर किसी को हाल ए दिल नहीं बताया हमने
प्यार में धोखा कोई नई बात नहीं दोस्तो
इस धोखे के नाम पर सब कुछ गंवाया हमने...
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