उनकी नज़रों में मिट्टी के घर नहीं आते
रहने वालों के उन्हें हाल नज़र नहीं आते
खुशी के आंसू ज़रा बचा कर रखना यारो
गमों के तूफान कभी कह कर नहीं आते
बड़े ही बे रहम होते हैं ये गुज़रे हुए लम्हें
बीते एक बार तो फिर लौट कर नहीं आते
मुसाफिरों के लिये दिल बेचैन क्या करिये
चल पड़ते हैं आगे फिर मुड़ कर नहीं आते...

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