मजबूर थे जो #मोहब्बत हम ज़ता न सके,,,
#ज़ख्म खाते रहे मगर किसी को बता न सके...
चाहतों की हद तक #चाहा उनको यारो,,,
पर अपना #दिल निकाल कर उन्हें #दिखा न सके...
चाहते है उनको कितना हम,,,
#अफ़सोस कि उनको ये #ज़ता न सके...
जब न कर सके #इक़रार उनसे #मोहब्बत का यारों...
तो हम भी #दर्दे दिल की #दांस्ताँ बता न सके...!!
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