हम महफिल से जा रहे हैं, मोहब्बत को हार के
लम्हें न भूल पायेंगे, जो पहलू में बिताये यार के
वीरान है गुलशन भी फिज़ां भी उदास दिखती है
न जाने अब कब आयेंगे, फिर से दिन बहार के
फुरसत मिले तो कर लेना याद हमारी भी यारा
तब तुमको याद आयेंगे, हर लम्हें अपने प्यार के
इक वक़्त वो भी था कि दीवानगी की हद थी
अब उम्र भर जीना पड़ेगा, यूं ही बिना दीदार के...
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