इससे पहले कि सनम, बेवफा हो जाएँ,
क्यों न उनकी ज़िंदगी से, जुदा हो जाएँ !
गर ख़ुशी मिलती है उन्हें हमारे बिना ही,
क्यों न उनके दिल से हम, दफ़ा हो जाएँ !
क्या होगा अब आगे ये है उनकी ज़िंदगी,
क्या मालुम कल वो खुद ही, ख़ुदा हो जाएँ !
सोचता हूँ छोड़ दूँ इस अजनबी शहर को,
कहीं फिर से न मुझ पे वो, खफा हो जाएँ !
बड़ी अजीब चीज़ है ये #मोहब्बत भी ,
क्यों न सब कुछ भूल कर, बेवफा हो जाएँ !
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