ये आंधियाँ ये बारिशें, आती रहेंगी मेरे बाद भी
ये पतझड़ ये गर्मियां, आती रहेंगी मेरे बाद भी
मैं रहूं न रहूं क्या फर्क पड़ता है किसी को,
गुलोगुलशन में बहारें, आती रहेंगी मेरे बाद भी
न रहने से मेरे कुछ न बदलेगा जमाने में,
ये महफिलें तो रंग, जमाती रहेंगी मेरे बाद भी
मेले लगते हैं फिर उजड जाते हैं एक दिन,
दुनिया में यूं ही रौनकें, आती रहेंगी मेरे बाद भी
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