मुकद्दर लिखने वाले, तूने ये क्या काम कर दिया
तूने दुनिया के सारे #दर्द को, मेरे ही नाम कर दिया
#तक़दीर में लिख दिया किसी और का नाम तूने,
और इस #ज़िन्दगी को, किसी और के नाम कर दिया
न समझ सका मैं तेरी बाज़ीगरी आज तक मौला,
तूने अच्छी भली सी ज़िन्दगी को, नाकाम कर दिया
क्या मिलता है तुझको किसी का #दिल दुखा कर,
खुद ही नाम दे कर हमें, फिर क्यों बेनाम कर दिया...
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