दुनिया में किसी का कोई, ग़म बंटाने नहीं आता,
कोई लफ़्ज़ों का मरहम भी, अब लगाने नहीं आता !
बाद मरने के निकल आते हैं जाने कितने रिश्ते,
अफ़सोस कोई जीते जी, रिश्ता निभाने नहीं आता !
दोस्ती ही काम आती है #ज़िन्दगी में एक हद तक,
वरना तो कोई अपना, झलक दिखलाने नहीं आता!
दूर वालों से भला क्या गिला शिकवा करें हम
अब तो पडोसी भी, अपना फ़र्ज़ निभाने नहीं आता !!!

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