अपनों की इज़्ज़त, कभी उछाली नहीं जाती
बुज़ुर्गों की कोई दुआ, कभी खाली नहीं जाती
न उम्र बची है न तो जज़्बात ही रहे अब वैसे,
पर क्या करें दिल की उड़ान, संभाली नहीं जाती
जानते हैं उस वे-वफ़ा की हर फितरत को हम,
मगर कोई बात उसकी, हमसे टाली नहीं जाती
सहने की इतनी ताक़त दी है ख़ुदा ने हमें, कि
किसी के खिलाफ, कोई बात निकाली नहीं जाती
ख़ुदा खैर करे कट जाए ज़िंदगी ख़ुशी से "मिश्र"
अब ग़म की कोई बात, दिल में बिठाली नहीं जाती
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