चेहरे बदल जाते हैं, मगर किरदार नहीं बदलते,
कितना भी करें ढोंग, मगर #अंदाज़ नहीं बदलते !
जो आता है चमकाता है पहले अपनी किस्मत,
अफ़सोस, कि जनता के, दिन रात नहीं बदलते !
कुर्सी भी बड़ी अजीब है भुला देती है सब वादे,
होती हैं नूरा कुश्तियां, मगर हालात नहीं बदलते !
मुडना है बेचारी भेड़ को ही चाहे कोई भी मूंडे,
बस हाथ बदल जाते हैं, पर हथियार नहीं बदलते !
फ़र्क नहीं पड़ता उनके जाने या इनके आने से,
होते हैं तमाशे रोज़ ही, मगर आसार नहीं बदलते !
न बदली है न बदलेगी अपनी तो तक़दीर "मिश्र"
बदल जाते हैं राजे, पर सिपहसालार नहीं बदलते !!!
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