जाने कैसे ख्याल दिल में चले आ रहे हैं
कोई मंज़िल नहीं फिर भी चले जा रहे हैं
ये दिले नादान इतना उदास मत हो
तेरी ही ख़ातिर हम यूं गम पिये जा रहे हैं
#मोहब्बत का ये कैसा मुकाम है यारो
हार कर भी जीत की बात किये जा रहे हैं
नतीज़ा पता हैं फिर भी न जाने क्यों
हम ख़्वाबों के गहरे भंवर में फंसे जा रहे हैं
ज़िंदगी में उजाला था उनकी वजह से
अब तो मुस्तकिल अंधेरों में घिरे जा रहे हैं
ऐ हवाओ हमारा पैगाम दे दो उनको
कि हम तो शोला-ए-ज़फा में जले जा रहे हैं...
You May Also Like





