समझने वाले के लिए, ज़रा सा इशारा काफी है
डूबने वाले के लिए, तिनके का सहारा काफी है
दिन तो कट जाता है ज़िंदगी की कश्मकश में,
रात गुज़रने के लिए, यादों का सहारा काफी है
जो डूबने से डरते हैं वो क्यों खेलते हैं सागर से,
उनके लिए तो बस, सागर का किनारा काफी है
जो लिखा है तक़दीर में मिलता वही है,
हमें तो जीने के लिए, ख़ुदा का सहारा काफी है

Leave a Comment