कभी हम भी उनके नज़दीक रहा करते थे
उनके दिए हर दर्द ओ ज़ख्म सहा करते थे
अपनी ज़िंदगी को न जाना कभी अपना
सिर्फ उनके लिए ही हम जिया मरा करते थे
लोग तो आते पूंछने खैरियत हमारी लेकिन
हम थे कि सिर्फ उनकी ही बात किया करते थे
हमारी औकात कुछ न थी ज़माने में दोस्तो
हर महफ़िल में उन्हीं का नाम लिया करते थे
एक साया गुज़र गया क़रीब से तो याद आया
कि हम भी कभी किसी से प्यार किया करते थे
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