मेरे ईश्वर! हज़ारों ऐब हैं मुझमे, नहीं कोई हुनर बेशक,
मेरी खामी को तू मेरी खूबी में तब्दील कर देना...
मेरी हस्ती है एक खारे समंदर सी मेरे दाता,
तू अपनी रहमतों से इसको मीठी झील कर देना।

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