दुनिया की बेरुख़ी ने, चुप रहना सिखा दिया
ज़िंदगी का हर गम, हमें सहना सिखा दिया
नहीं होता अहसास हमें किसी दर्द का अब,
यूंही क़ातिलों के बीच, हमें रहना सिखा दिया
बहुत शुक्रिया उन राहों के पत्थरों का दोस्तोि,
जिन की ठोकरों ने, हमें चलना सिखा दिया
ये करम है इस खुदगर्ज़ जमाने का दोस्तो,
कि दुश्मन दोस्त में, फ़र्क करना सिखा दिया...
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