वोटों के लिए ये तो बहुत कुछ कह जाते हैं,
ये ही तो हैं जो हाथ जोड़ बुद्धू बनाते हैं.
वोटों से पहले तो ये हाथ जोड़ घर घर आते हैं,
फिर न जाने पांच साल कहाँ ईद का चाँद हो जाते हैं...

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