दुनिया में न जाने कैसा, ये मंज़र नज़र आता है,
मुखौटों के पीछे असल में, कुछ और नज़र आता है...
पहना है भेड़िओं ने अब आदमी का चोला दोस्तो,
आँखों में देखो झांक कर, तो साफ नज़र आता है...

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