खुदगर्ज़ दुनिया में, ए दिल तू रहना सीख ले
ज़माने के रंजो ग़म, अब तू सहना सीख ले
जो दिलों में घुस कर करते हैं घात पीछे से,
पहचान कर उनको, ज़रा दूर रहना सीख ले
क्यों घुटता है तू औरों के लिये इतना दोस्त,
सच को सच, झूठ को झूठ कहना सीख ले
उठाई हैं ज़ोखिमें कितनी तूने यारा अब तक,
अब खुदा के नाम पर, तू ना कहना सीख ले
कब तक देखेगा राह तू अपनों की ऐ दोस्त
कोई न आएगा अब, तू तन्हा रहना सीख ले
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