यूं तो अब सांस लेना भारी है
फिर भी अपना सफर जारी है
यहाँ बिकते हैं मुफ्त में दिल
ये भी भला कैसी दुकानदारी है
शक्ल तो इंसान की है मगर
कोई परिंदा तो कोई शिकारी है
टूटते हैं दिल गमों की नोंक से
हमें तो गमों की चोट प्यारी है
लोग सोचते हैं कि खुश हैं हम
मगर दोस्ती ग़मों से हमारी है...

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