ऐ #दोस्त..!
अब तू ही बता तुझे ऐसा करने की #जरुरत क्या थी ?
#चाहते तो हम भी खोल देते, #किताब अपने #दिल की....
मगर उसे #पढ़ने वालो को #फुरुसत नहीं थी!
#नफरत इतनी मिली उनसे यारों कि..
जितनी मुझे अपने #दुश्मनों से भी नही थी..
कर देते #हम भी #बेवफाई उनसे उनकी तरह..
पर दोस्तो #फितरत हमारी ऐसी नही थी..!!!
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