दोहरे चरित्र के लोगों से तो, बस भगवान बचायें
क्या है उनके अंतर्मन में,कैसे क्या अनुमन लगायें
मतलब हासिल होता है, तो परम मित्र बन जायेंगे
मन का मैल छिपा कर वे, भ्रात्व मूर्ति बन जायेंगे
मतलब पूरा होते ही, असली चरित्र दिखा सकते हैं
गैरों को भी पीछे छोड़, दूसरा चरित्र दिखा सकते हैं
ऐसे लोगों से बस दूर रहो, तभी सुखी रह पाओगे
निश्छल मन से काम करो, सबके होकर रह पाओगे

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