चलिए मगर, यूं फासले, मत बनाइये
फ़क़त अपने लिए रस्ते, मत बनाइये
हैं और भी मुसाफिर तेरी राहों के यारा
उनसे दुश्मनी के रिश्ते, मत बनाइये
बिना हमसफ़र के न कट सकेंगी राहें
सरपट सी ज़िंदगी में गड्ढे, मत बनाइये
मोहब्बत के सिवा सारे मज़हब हैं झूठे
दिलों को नफरतों के अड्डे, मत बनाइये
जो कुछ भी है पास वो खुदा की नेमत है
झूठी मिल्कियत के सपने, मत सजाइये
भले ही दूर हैं पर अपने तो अपने हैं "मिश्र"
कभी दिलों में उनसे फासले, मत बनाइये
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