तन्हाईयों की ज़िंदगी अच्छी नहीं लगती
उनके बिना भीड़ भी अच्छी नहीं लगती
आदत नहीं मुझे उनके बिन रहने की,
महफ़िलों की शान भी अच्छी नहीं लगती
रात का सन्नाटा डराता है मेरे दिल को,
दूर बजती शहनाई भी अच्छी नहीं लगती
क्यों बेचैन है मेरा दिल इतना ?
कि दिल्लगी भी अब अच्छी नहीं लगती
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