शोहरत के साथ रिश्ते भी, अजीब सा अहसास कराते हैं
जिनकी सूरत भी याद नहीं, हमें दिल के पास बताते हैं
जो मुफलिसी में छुपाते थे हमसे अपना रिश्ता यारो,
आज वही दुनिया के सामने, हमें अपना ख़ास बताते हैं
कैसी है ये दुनिया जहां आदमी की कोई क़द्र नहीं "मिश्र",
दौलत है तो सब तुम्हारे, वरना तो सब उपहास उड़ाते हैं...

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