ज़रा सी है ज़िंदगी, बस इसलिये ख़ामोश हूँ
लोग पूछेंगे क्या बात है, इसलिये ख़ामोश हूँ
सब्र का बांध कब टूट जाये क्या पता यारो,
किस्मत अभी ख़िलाफ है, इसलिये ख़ामोश हूँ
मुश्किलें ज़रूर हैं मगर अभी ठहरा नहीं हूँ ,
अभी कांटे हटाना शेष है, इसलिये ख़ामोश हूँ
मंज़िलों से कह दो कि पहचूँगा ज़रूर उनतक,
मुश्किलों में कारवाँ है, बस इसलिये ख़ामोश हूँ
सोचता हूँ बता दूं अपनी दास्ता न ए मोहब्बत
पर सब पूंछेंगे वो कोंन है, इस लिये ख़ामोश हूँ...
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