अपने नसीब में, अपनों का सहारा नहीं दोस्तो
कितना ही दिल लुटाऊँ, कोई हमारा नहीं दोस्तो
बड़ा ही खुदगर्ज़ समंदर है ये दुनिया,
कितने ही पैर पटको, कोई किनारा नहीं दोस्तो...
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अपने नसीब में, अपनों का सहारा नहीं दोस्तो
कितना ही दिल लुटाऊँ, कोई हमारा नहीं दोस्तो
बड़ा ही खुदगर्ज़ समंदर है ये दुनिया,
कितने ही पैर पटको, कोई किनारा नहीं दोस्तो...