धूल के ज़र्रे, पत्थर के टुकड़े को भी पहाड़ समझते हैं
चूहे, हल्की आवाज़ को भी शेर की दहाड़ समझते हैं
छोटे तो अदब करते हैं बड़ों का,
पर बड़ों का क्या, वो तो छोटों को कबाड़ समझते हैं

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