ज़रा देर तो ठहर, मेरे दिल से उतर के ना जा
अपनी ज़िद में आ के, हमें बर्बाद कर के ना जा
हमें गम नहीं तेरी जुदाई का सनम,
पर तू अपने दिल में, उदासियाँ भर के ना जा
समेटे थे दामन में हए दुख सुख तेरे,
तू इस तरह ज़िंदगी से, फिर बिखर के ना जा
क्या कहोगे हमारी उलफत के सवाल पे,
इस तरह बिना कुछ कहे, नज़र छिपा के ना जा
ख़ामियां तो होती हैं हर शख्स में जानम
मेरी ख़ामियों की तपिश, दिल से लगा के ना जा
यादों के सिवा कुछ भी न बचा मुझ पर
उन यादों के पुलंदों में तू, यूं आग लगा के ना जा...
You May Also Like





