मतलब परस्त लोगों पर, ऐतबार क्या कीजे
दिलों में है बेरुखी, किसी से प्यार क्या कीजे
#तन्हा जीना भी कोई जीना है दोस्तो, मगर
जो बेदर्द चला गया, उसका इंतज़ार क्या कीजे
जो तोड़ते हैं #दिल को एक खिलौना समझ कर,
ऐसे बेवफा दरिंदों पर, दिल निसार क्या कीजे
#ज़िंदगी तो बस एक झंझटों का झमेला है दोस्त
गुज़र गयीं जो आफतें, उन पे विचार क्या कीजे...
You May Also Like





