हर दिल में अजीब सी, मैं घुटन देखता हूँ
पतझड़ से उजड़ा हुआ, मैं चमन देखता हूँ
अब अंधेरों में जीना सीख लो यारो क्योंकि,
सूरज की चमक में भी, मैं ग्रहण देखता हूँ
दुनिया न जाने किधर जा रही है या खुदा,
हर तरफ इंसानियत का, मैं दमन देखता हूँ
ग़मों का सैलाव उमड़ रहा है हर दिल में,
दुनिया से दुखी लोगों का, मैं रुदन देखता हूँ
सबकी तमन्ना है कि जी भर के जीलें मगर,
हर शख्स के हाथों में अब, मैं कफन देखता हूँ...
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