गर हिस्से में आयी तन्हाई तो क्या करेंगे
उनकी यादों में नींद न आई तो क्या करेंगे
अपने दर्द ए दिल को संभालेंगे कैसे
गर जमाना बन बैठा तमाशाई तो क्या करेंगे
दिल पर हमारा बस नहीं चलता यारो
किसी और से हो गयी आश्नाई तो क्या करेंगे
मोहब्बत की तपिश से बेहाल हैं हम
कलेजे में गर ठण्डक न आई तो क्या करेंगे
कांटों से भरी हैं ये उल्फत की राहें
गर हमें मंज़िल न मिल पाई तो क्या करेंगे
बस यही सोच कर परेशान हैं हम
कि हमारी ज़िंदगी पे बन आई तो क्या करेंगे  ?

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