आज तो मेरे मरने का मज़ा आ रहा है,
हर कोई मेरे करीब आ रहा है
जो मुझसे हमेशा ही दूर भागता था,
वो भी आज मेरे करीब आ रहा है
जिसने सदा मुझे अपना शत्रु कहा,
वो भी आज मेरे ही गुण गा रहा है
मेरा चेहरा कभी जो न देखा प्यार से,
वो बस मुझको निहारे जा रहा है
कतरन भी जिसने न दी जिंदगी में,
वो मुझ को शालें उडाये जा रहा है
अब क्या होगा इन दुशालों का भाई,
क्यों फ़र्ज़ अपना निभाये जा रहा है
गिर गया तो कोई न आया उठाने,
आज हर कोई मुझको उठाए जारहा है
अपनों के कंधों पर लदा हूं मैं पर,
पीछे से हर कोई कंधा लगाये जा रहा है
गर इतना सा प्यार् मुझे जीते जी मिलता,
जितना मरने पे दिया जा रहा है
काहे को फिरता अजनबी सा बन कर,
क्यों होता ऐसा जो किया जा रहा है
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