Shanti Swaroop Mishra

921
Total Status

Duniya Mein Khud ko Badalna Padta Hai

जब नयी कोपलें आती हैं तो पत्तों को झड़ना पड़ता है
जब नयी फसल आती है तो पुरानी को खर्चना पड़ता है
ये दुनिया है खुद को बदलने वालों की
गर नहीं बदले तो दुनिया से अकेले को लड़ना पड़ता है

Log Agar Ab Bhi Naa Samjhe To

कभी मेरी छांव तले, पथिकों का शहर हुआ करता था
कभी मेरी बाहों में ,चिड़ियों का घरवार हुआ करता था
तपती किरणों का वो लावा, मुझसे मजबूर रहा करता था
भारी तूफानों से टकरा कर भी, मैं मजबूत रहा करता था
मैने तूफानों को टक्कर दी, जो टकराया समझो हार गया
जीवन में मैं कभी न हारा, बस नन्हें कीडों से हार गया
दुष्टों ने जड़ को खाकर, मेरा हरियाला जीवन छीन लिया
सब साखें मेरी सूख गयीं,पत्तों का भी जीवन छीन लिया
अब खड़ा हुआ हूं ठूठ बना मैं, अब गिद्धों का यहाँ बसेरा है
अब पथिक देख कर दूर भागता, जैसे भूतोँ का यहाँ डेरा है
लोग अगर अब भी ना समझे, तो मेरा सा हाल हुआ समझो
गर छोटे दुश्मन को कमतर समझा, अपना बेहाल हुआ समझो

Log to Bhagwan Bhi Badal Lete Hein

बड़े नादान हैं लोग जो लोगों से वफा की उम्मीद कर लेते हैं
बड़े मूर्ख हैं लोग जो अपनों से मदद की उम्मीद कर लेते हैं
ये दुनिया है मतलब की प्यारे
अगर दुआ कबूल नहीं होती तो लोग भगवान भी बदल देते हैं

Tu Jannat Se Fir Yahan Chali Aayi

जाम में फंसी मेरी गाड़ी से, जन्नत की एक रूह यूं ही टकराई
मैने पूंछा मन नहीं भरा, जो तू जन्नत से फिर यहाँ चली आई
वो बोली, वहां की आवोहवा में दम घुटता है,
जन्नत में नहीं मिली धुएं की ख़ुराख, तो यहाँ लेने चली आई

भारत देश से जाने वाली हर रूह, वहां यूं ही बीमार पड़ी है
जन्नत के हर हकीम के सामने, एक विकट समस्या खड़ी है
जन्नत में इस बीमारी की दवा ‘प्रदूषण’ कहीं नहीं मिलता,
अतः बीमार हर रूह, भारत के चौराहों पर मुंह बाये खड़ी है
 

Shabdon Ke Ghaav Nahi Bharte Hein

शब्दों के नुकीले दांत, अंदर तक मार करते हैं
घुसते हैं जेहन से, पर ज़िगर पर बार करते हैं
रहजाते हैं पैबस्त होकर दिल के कोने में,
जन्म गुज़र जाता है, पर नहीं वो घाव भरते हैं