6 Results
जनाजा मेरा उठ रहा था,
फिर भी तकलीफ थी उसे आने में!
बेवफा घर में बैठी पूछ रही थी,
और कितनी देर है दफनाने में?
View Full
मौत से क्यों डरते हैं हम, उसे तो आना ज़रूर है
क़फन तो अखिरी चोला है, उसको बदलना ज़रूर है
View Full
अगर बिकी तेरी #दोस्ती,
तो पहले ख़रीददार हम होंगे..!
तुझे ख़बर न होगी तेरी क़ीमत,
View Full
किताब ए #इश्क़ में क्या कुछ दफ़्न मिला,
मुड़े हुए #पन्नों में एक भूला हुआ #वादा मिला...
View Full
दिखा आज कुछ ऐसा यारों,
क्या, वो दिलकश #नज़ारा था...
मिला राह में फिर से मुझको,
एक #हमनशी का
ज़नाजा था..
View Full
इंग्लिश में हिंदी शायरी
The जनाजा of आशिक़
is निकला from the
गली of महबूबा
with very ज़ोर शोर
The महबूबा झांकी from the door
View Full