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ना पूछिये कि ये ज़िन्दगी कैसे गुज़री
हमारी वो सहर ओ
शाम कैसे गुज़री
मुद्दत गुज़र गयी यूं डूबते उछलते
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आज क्यों हैं ये आंसू यूं छलछलाते हुए
गुज़र गयीं मुद्दतें किसी को भुलाते हुए
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ज़िंदगी का ये #सफर, तमाम अब होने को है
गुज़र गया ये दिन भी,
शाम अब होने को है
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आती है याद उनकी, जैसे ही
शाम ढलती है !
रोता है दिल, जब सितारों की शमा जलती है !
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मुझे तो हर तरफ, सिर्फ अँधेरा नज़र आता है,
ज़िंदगी का हर रंग, अब बदरंग नज़र आता है !
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दिल के जज़्बात मैं, ज़माने को जता देता हूँ,
दिल की हर एक बात, यारों को बता देता हूँ !
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कहाँ से चले थे मगर कहाँ आ गए, हम संभलते संभलते
खुद को ही बदल डाला हमने, दुनिया को बदलते बदलते
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एक आदमी पहली बार ससुराल गया,
उसकी सास ने उसे 7 दिन तक
सुबह-
शाम पालक का साग खिलाया।
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कभी तो चाँद आसमान से उतरे और आम हो जाये,
तेरे नाम की एक खूबसूरत
शाम हो जाये,
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जब कभी बादल, मेरे आँगन पे गरजते हैं,
तब तब उनकी यादों के, साये लरजते हैं !
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