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हर दिन अगर सुहाना है, तो उसकी
मंज़िल रात क्यों है
जीत में गर खुशी है, तो खेल में हार की बात क्यों है
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गर गुलिश्तां है जिंदगी, तो इसकी
मंज़िल श्मशान क्यों है
बिछड़ना ही है अगर प्यार में, तो वो इतना हैरान क्यों है
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छोटी छोटी खुशियाँ ही, जीवन को सफल बनाती हैं,
ये छोटी छोटी राहें ही, हमें #
मंज़िल तक पहुँचाती हैं,
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बाधा तो एक चुनौती है, स्वीकारो, डरने का कोई काम नहीं
बार बार प्रयास करो, सफल बनो, रुकने का कोई काम नहीं
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एक लीक पर चलने वाला, मुश्किल से
मंज़िल पाता है
बस पूरा जीवन चलते चलते, आखिर में थक जाता है
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खुद ही तय करते हैं
मंज़िलें, रास्ता भी खुद बनाते हैं
जीते हैं अपनी शर्त पर, अपनी दुनिया भी खुद बनाते हैं
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इन फरेबों से भरी दुनिया में, ऐतबार है दोस्ती,
अपनी
मंज़िल पाने के लिये, सह सवार है दोस्ती,
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जब कोई रिश्ता नहीं तो फिर टोकते क्यों हैं
मैं जिधर जाऊँ मेरी मर्ज़ी मुझे रोकते क्यों हैं
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गर हिस्से में आयी तन्हाई तो क्या करेंगे
उनकी यादों में नींद न आई तो क्या करेंगे
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हर किसी को दिल की चाहत मत समझ लेना
उसको अपनी आखिरी
मंज़िल मत समझ लेना
कहीं हंस कर मिलना फितरत न हो किसी की
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