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ये दिल हमारा इस कदर, यूं फटा न होता
अगर ये अपनों के फेर में, यूं फंसा न होता
कुछ तो कुसूर है अपना पिछले जनम का,
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मतलब परस्त लोगों पर, ऐतबार क्या कीजे
दिलों में है बेरुखी, किसी से प्यार क्या कीजे
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दुनिया में खुशियों के नज़ारे, कम नज़र आते हैं,
हर किसी के दिल में, गम ही गम नज़र आते हैं !
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जाने क्यों लोग, किसी का दिल तोड़ देते हैं,
अपनों से नाता तोड़ के, गैरों से जोड़ लेते हैं !
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उनका ख़याल दिल से, हम मिटा न पाए,
बहुत चाहा भूलना मगर, हम भुला न पाए !
उनकी जफ़ाओं का है याद हमें हर लम्हां,
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दिल के तूफ़ान को, होठों तक ज़रा आने तो दीजिये,
ग़मों के काले बादलों को, दूर ज़रा जाने तो दीजिये !
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दुनिया की झूठी रिवायतें, तोड़ने की कोशिश में हूँ,
टूटे
दिलों की ख्वाहिशें, मैं जोड़ने की कोशिश में हूँ !
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नेताओं को जनता में, बस वोट नज़र आती है,
जनता तो पागल है, बस ये सोच नज़र आती है!
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जो चलाते हैं खंज़र, भला उनका क्या जाता है ,
देख कर दर्द औरों का, उनको तो मज़ा आता है !
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मकां तो मिलते हैं मगर, कोई भी घर नहीं मिलता !
अब ईंट और गारे में,
दिलों का असर नहीं मिलता !
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